देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने इस साल की भारी बरसात और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से ₹5,702.15 करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। इस राशि का उपयोग न केवल क्षति की भरपाई बल्कि भविष्य में होने वाली आपदाओं से बचाव के लिए भी किया जाएगा।
इस घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे गए एक ज्ञापन में, राज्य आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने नुकसान की सीमा और केंद्रीय सहायता की तत्काल ज़रूरतों का विवरण दिया है।
विभिन्न विभागों का नुकसान
ज्ञापन के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच भूस्खलन, अचानक बाढ़, भारी बारिश और अन्य आपदाओं से राज्य के सरकारी विभागों को लगभग ₹1,944.15 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ है।
- लोक निर्माण विभाग व ग्रामीण सड़कों का नुकसान लगभग ₹1,163.84 करोड़
- सिंचाई ढाँचों का नुकसान लगभग ₹266.65 करोड़
- ऊर्जा विभाग का नुकसान लगभग ₹123.17 करोड़
- स्वास्थ्य सेवाएँ का नुकसान लगभग ₹4.57 करोड़
- स्कूल शिक्षा का नुकसान लगभग ₹68.28 करोड़
- उच्च शिक्षा का नुकसान लगभग ₹9.04 करोड़
- मत्स्य विभाग का नुकसान लगभग ₹2.55 करोड़
- ग्रामीण विकास का नुकसान लगभग ₹65.50 करोड़
- शहरी विकास का नुकसान लगभग ₹4 करोड़
- पशुपालन विभाग का नुकसान लगभग ₹23.06 करोड़ होने का अनुमान है
- अन्य सरकारी विभागों ने कुल मिलाकर लगभग ₹213.46 करोड़ का नुकसान होने की सूचना दी है।
पैकेज का उपयोग कहाँ होगा?
- ₹1,944.15 करोड़ क्षतिग्रस्त ढाँचे की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए
- ₹3,758 करोड़ संवेदनशील और जोखिम वाले क्षेत्रों (सड़कें, पुल, आबादी वाले इलाके और अन्य सार्वजनिक ढाँचे) को मजबूत करने के लिए, जो आगे भी विनाश के जोखिम में हैं।
विनोद कुमार सुमन ने कहा, “यह सहायता उत्तराखंड पर बार-बार होने वाली आपदाओं के प्रभाव को कम करने और बड़े पैमाने पर नुकसान से बचने के लिए महत्वपूर्ण है।”
जन और पशुधन हानि
राज्य में चालू मानसून के दौरान मानव और पशुधन की भी भारी क्षति हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच
- 79 लोगों की मृत्यु, 115 घायल और 90 लोग लापता
- वर्षाजनित घटनाओं में लगभग 3,953 पशुधन की मौत
- 2,835 पक्के मकान और 402 कच्चे मकान/दुकान/होटल/होमस्टे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त
बारिश का आंकड़ा
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 3 सितंबर तक उत्तराखंड में 1,265.5 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य मात्रा 1,009.5 मिमी होती है यानी इस मानसून सीज़न में राज्य में सामान्य से 25% अधिक वर्षा दर्ज की गई है। कई जिलों में तो वर्षा के आंकड़ों में भारी अंतर देखा गया है। जो निम्नलिखित रूप से है
- बागेश्वर में सबसे अधिक 249% बारिश दर्ज की गई है सामान्य 679.2 मिमी के मुकाबले 2,370.2 मिमी बारिश
- चमोली में 91% अधिक बारिश हुई
- टिहरी गढ़वाल में 59% अधिक बारिश हुई
- हरिद्वार में 55% अधिक बारिश हुई
- अल्मोड़ा में 36% अधिक बारिश हुई
- देहरादून में 32% अधिक बारिश हुई
- ऊधम सिंह में नगर 33% अधिक बारिश हुई
इसके अतिरिक्त अधिक बारिश के कारण राज्य भर में बाढ़, भूस्खलन और नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। जिसके कारण प्रशासन लगातार अलर्ट जारी कर रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि ज्ञापन में राहत, पुनर्वास और क्षमता निर्माण को जोड़कर तात्कालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह की आवश्यकताओं को सूचीबद्ध किया गया है। एक अधिकारी ने कहा, “मांग पैकेज न केवल पुनर्निर्माण के लिए है, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के और अधिक क्षति को रोकने और आपदा-प्रवण क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की सुरक्षा के लिए भी है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड इस साल की भारी बरसात और प्राकृतिक आपदाओं से गहरे संकट से गुज़र रहा है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र से माँगा गया ₹5,702.15 करोड़ का विशेष पैकेज केवल वर्तमान नुकसान की भरपाई के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाली आपदाओं से बचाव के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। भूस्खलन, बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित सड़कों, पुलों, शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य ढाँचों का पुनर्निर्माण तत्काल ज़रूरी है, ताकि आम जनता का जीवन सामान्य हो सके।
मानव और पशुधन हानि, हजारों घरों का नुकसान तथा लगातार बढ़ते आपदा-जोखिम को देखते हुए यह सहायता पैकेज राज्य की सुरक्षा, पुनर्वास और दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। यह कदम न केवल आपदा-प्रवण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित करेगा, बल्कि प्रदेश की नाज़ुक अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचे को भी स्थिरता प्रदान करेगा।
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