Pahadi Cuisine of Uttarakhand: दोस्तों उत्तराखंड, जिसे देवभूमि भी कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और पारंपरिक भोजन के लिए प्रसिद्ध है। उत्तराखंड का पहाड़ी व्यंजन सादा, स्वास्थ्यवर्धक और स्थानीय रूप से उगाई जाने वाली सामग्रियों से बनाया जाता है। यह पहाड़ी लोगों के जीवन को दर्शाता है – प्रकृति, गर्मजोशी और सादगी से भरपूर।
इस लेख में, हम कुछ लोकप्रिय पहाड़ी व्यंजनों, सामग्रियों और पहाड़ी भोजन की विशिष्टता के बारे में जानेंगे। चाहे आप पहाड़ी क्षेत्र से हों या भारत के किसी भी हिस्से के भोजन प्रेमी हों, यह गाइड आपको उत्तराखंड के भोजन को समझने और उसका आनंद लेने में मदद करेगी।
उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजन क्यों होते हैं इतने खास?
- पौष्टिक और स्वाद से भरपूर – हमारे पहाड़ों में बनने वाला खाना ना सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को ताकत देने वाला भी होता है।
- स्थानीय अनाज, दालों और सब्जियों से बना – यहां की थाली में आपको मंडुवा, झंगोरा, भट्ट, और पहाड़ी तोरई जैसी देसी चीज़ें मिलेंगी जो हमारी मिट्टी की सौगात हैं।
- कम तेल और मसालों में पकाया जाता है – पहाड़ी खाना सादगी में ही स्वाद ढूंढता है; ज़्यादा तामझाम नहीं, बस हल्के मसालों में पका हुआ दिल से जुड़ा स्वाद।
- अधिकतर शाकाहारी, पर मांसाहारी स्वाद भी कम नहीं – पहाड़ों पर ज़्यादातर लोग शुद्ध शाकाहारी खाना खाते हैं, लेकिन जो मांसाहारी बनाता है वो भी पहाड़ी मसालो के साथ और हमारे यह का पानी उसे और भी खास स्वाद देता है।
- मौसमी और ताज़ा – चाहे बुरांश के फूल हों या कंडाली की सब्ज़ी, हम पहाड़ वाले जंगलों और खेतों से सीधी ताज़ी चीज़ें ही अपनी रसोई में लाते हैं। मतलब हम पहाड़ी दुकानों पर ज्यादातर निर्भर नहीं रहते है।
उत्तराखंड के लोकप्रिय पहाड़ी व्यंजन | Popular Pahadi Dishes of Uttarakhand
तो दोस्तों आइए कुछ सबसे पसंदीदा पहाड़ी व्यंजनों पर एक नज़र डालते हैं:
1. आलू के गुटके – सरसों और सूखी लाल मिर्च के साथ पकाया जाने वाला एक मसालेदार सूखा आलू का व्यंजन, जिसे अक्सर भांग की चटनी और रोटी के साथ परोसा जाता है।
2. कफुली – पालक या लाई साग से बनी एक गाढ़ी और स्वादिष्ट हरी करी, जिसे घी, चावल, या रोटी के साथ गरमागरम परोसा जाता है।
3. चैनसू – भुनी हुई उड़द दाल से बनी प्रोटीन से भरपूर करी, जिसे साधारण मसालों का इस्तेमाल करके मिट्टी के स्वाद के लिए धीमी आँच पर पकाया जाता है। और स्वाद में तो क्या ही कहना आपको ये बहुत पसंद आएगी और घी हो तो और भी बढ़िया।
4. फानू – भीगी हुई दालों से बनी एक स्वादिष्ट दाल, जिसे धीमी आँच पर पकाया जाता है और गढ़वाल क्षेत्र में आम तौर पर खाया जाता है। यदि आप पहाड़ी हो खासकर पौड़ी गढ़वाल, बीरोंखाल छेत्र से तो आपने ये जरूर खाया होगा।
5. झंगोरा खीर – बाजरे, दूध, चीनी और सूखे मेवों से बनी एक मीठी मिठाई, जिसे आमतौर पर त्योहारों पर परोसा जाता है।
6. गहत (कुलथी) की दाल – कुलथी से बनी एक स्वास्थ्यवर्धक दाल जो पाचन में मदद करती है और सर्दियों में शरीर को गर्म रखती है।
7. थेचवानी – कुटे हुए (थिचे आलू) आलू और मूली से बना एक तीखा और मसालेदार गढ़वाली व्यंजन, जिसे स्थानीय मसालों के साथ पकाया जाता है।
8. बाड़ी – मंडुआ के आटे से बना एक सरल और पौष्टिक व्यंजन, जिसे घी और हरी चटनी के साथ गरमागरम खाया जाता है।
9. बाल मिठाई – बाल मिठाई उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध मिठाइयों में से एक है। इसे खोये (जिसे दूध को गाढ़ा करके बनाया जाता है) से बनाया जाता है और छोटी-छोटी सफेद चीनी की गोलियों से ढका जाता है। इसके चॉकलेट जैसे भूरे रंग के कारण, लोग इसे उत्तराखंड की चॉकलेट भी कहते हैं। आपको यह मिठाई अल्मोड़ा में ज़रूर चखनी चाहिए, जहाँ यह सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है। एक स्थानीय कहावत है कि यह मिठाई बच्चों (“बालक”) को बहुत पसंद आती थी—इसीलिए इसका नाम पड़ा। ये मिठाई आपको रामनगर, पीरुमदारा में आसानी से मिल जाएगी।
10 भांग की चटनी – यह भुने हुए भांग और जीरे से बनी एक तीखी चटनी है। इसमें नमक, नींबू या इमली का रस, लहसुन और कभी-कभी लहसुन के पत्ते भी डाले जाते हैं। यह चटनी आमतौर पर रोटियों और घी के साथ परोसी जाती है और पाचन के लिए अच्छी होती है, खासकर गर्मियों में।
11. झंगोरे की खीर – झंगोरा (बाजरा), दूध और चीनी से बनी एक स्वादिष्ट मिठाई। सूखे मेवों से सजाकर, इसे अक्सर त्योहारों पर परोसा जाता है। झंगोरा आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है और ग्लूटेन-मुक्त होता है, जिससे यह मधुमेह या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए एक स्वस्थ विकल्प बन जाता है।
12. पहाड़ी रायता – दही, कद्दूकस किया हुआ खीरा, राई, हल्दी, हरी मिर्च और नमक मिलाकर बनाया गया एक ताज़ा साइड डिश। कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्रों में इसे लगभग हर भोजन के साथ परोसा जाता है। यह रायता शरीर को ठंडक पहुँचाता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।
13. लेसू – लेसू एक विशेष प्रकार की रोटी है जो गेहूँ के आटे में मडुआ (बाजरा) भरकर बनाई जाती है। इसे आम रोटी की तरह बेलकर पकाया जाता है। यह थोड़ी खुरदरी और गहरे भूरे रंग की होती है। घी और चटनी के साथ परोसी जाने वाली यह स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक दोनों होती है।
14. गहत (कुलथ) की बड़ी – ये गहत दाल के पेस्ट (घोड़े की दाल) से बने छोटे तले हुए गोले होते हैं। इनका इस्तेमाल कई तरह की करी में किया जाता है और ये बेहद पौष्टिक होते हैं। माना जाता है कि गहत दाल गुर्दे की पथरी के इलाज में मदद करती है और सर्दी-ज़ुकाम में भी फायदेमंद होती है। गहत की रोटी और गहत का सूप भी खास तौर पर सर्दियों में लोकप्रिय हैं। यह आपके सरीर को गर्म बनाए रखता है।
15. लिंज की सब्ज़ी – लिंज नदियों के किनारे पाई जाने वाली एक हरी पत्तेदार सब्ज़ी (फ़र्न) है। इसे आम सब्ज़ी की तरह पकाया जाता है या अचार में इस्तेमाल किया जाता है। यह विटामिन और खनिजों से भरपूर है और मधुमेह और त्वचा संबंधी समस्याओं में मददगार है।
16. चैनसू – यह व्यंजन भुनी हुई उड़द दाल से बनाया जाता है। दाल को पीसकर पेस्ट बनाया जाता है और लोहे की कड़ाही में धीरे-धीरे पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद गहरा और मिट्टी जैसा हो जाता है। यह मुख्य रूप से गढ़वाल में खाया जाता है।
17. सिसुनक साग – बिच्छू घास (बिच्छू घास) से बना एक पारंपरिक और दुर्लभ व्यंजन। इसे सावधानी से संभालना पड़ता है क्योंकि यह पौधा कच्चा होने पर खुजली और झनझनाहट पैदा करता है। इसे उबालने और पीसने के बाद, पत्तों को घी और टमाटर के साथ पकाया जाता है। इसका अनोखा स्वाद होता है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
18. सिंगोड़ी – खोया, कसा हुआ नारियल और चीनी से बनी एक स्वादिष्ट मिठाई। इलायची के हल्के स्वाद के साथ, इसे ताज़ा रखने के लिए मोलू के पत्ते में लपेटा जाता है। सिंगोड़ी अल्मोड़ा में विशेष रूप से लोकप्रिय है और बाल मिठाई के बाद दूसरी सबसे पसंदीदा मिठाई है।
पहाड़ी भोजन में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री | Ingredients Used in Pahadi Cuisine
दोस्तों, यहाँ के व्यंजनों में मुख्यतः स्थानीय अनाज (मंडुआ, झंगोरा), देशी दालें (भट्ट, गहत), जड़ी-बूटियाँ (जम्बू, गांठी) और ताज़ी मौसमी सब्ज़ियाँ (कंडाली, नाली) का उपयोग किया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए सरसों का तेल, भांग की चटनी और घी का उपयोग किया जाता है।
उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजनों में प्रयुक्त होने वाली स्थानीय सामग्रियों की एक सूची इस प्रकार है:
| Ingredient | Local Name | Use in Dish |
| Mandua (Ragi) | Mandua | Used in Baadi and Roti |
| Jhangora | Barnyard millet | Used in Kheer |
| Kulthi | Gahat | Used in Gahat ki Dal, Paratha |
| Palak/Lai | Spinach | Used in Kafuli |
| Bhatt | Black soybeans | Used in Bhatt ki Churkani |
| Jakhiya | Wild mustard | Used for tempering dishes |
| Bhang | Hemp seeds | Used in chutney |
पहाड़ी खाना पकाने का तरीका | Cooking Methods in Pahadi Cuisine
दोस्तों, आज भी गांवों में खाना लकड़ी के चूल्हे पर धीमी आंच पर पकाया जाता है, लोहे की कड़ाही में भूना जाता है जिससे स्वाद भी बढ़ता है और शरीर को आयरन भी मिलता है; कम तेल और हल्दी, धनिया, सरसों जैसे स्थानीय मसालों का अधिक उपयोग किया जाता है। पर आजकल काफी गांवों में या में यु कहुँ की हर घर में सरकार द्वारा एलपीजी गैस सुविधा दी गयी है जिससे काफी हेल्प मिली है लोगो को जिससे वे आसानी से खाना बना पा रहे है। पर बात की जाए चूल्हे की तो आज भी और सायद आगे भी लोग इसका इस्तेमाल करते रहेंगे।
त्योहारों और दैनिक जीवन में पहाड़ी भोजन | Pahadi Food in Festivals and Daily Life
दोस्तों, शादी-ब्याह हो या त्योहार, उत्तराखंड में अरसा, सिंगोरी और झंगोरे की खीर जैसे पारंपरिक पकवानों से थाली सजती है, वहीं रोजमर्रा की जिंदगी में सादा दाल-चावल और भांग-टमाटर की तीखी चटनी हर पहाड़ी के स्वाद का हिस्सा होती है।
पहाड़ी व्यंजनों के स्वास्थ्य लाभ | Health Benefits of Pahadi Cuisine
दोस्तों, उत्तराखंड की पहाड़ियों में बना हर व्यंजन सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी होता है। और ये पहाड़ी लोग अछि तरह से जानते है। यहां की रसोई में मिलने वाले काले भट, गहत, मंडुवा, झंगोरा जैसे देसी अनाज और जड़ी-बूटियाँ न सिर्फ शरीर को ताकत देती हैं, बल्कि मौसम के अनुसार शरीर को संतुलित भी रखती हैं। चलिए जानते हैं इन पारंपरिक पहाड़ी खानों के कुछ गजब के स्वास्थ्य लाभ — बिल्कुल अपनी पहाड़ी बोली की मिठास के साथ।
- काले भट, राजमा और मंडुए जैसे अनाज से भरपूर, जो शरीर को फाइबर, आयरन और प्रोटीन का अच्छा स्रोत देते हैं।
- भट की दाल और केले की रोटी जैसे फाइबर युक्त खाने से पेट साफ रहता है और दिनभर चुस्ती बनी रहती है।
- मंडुआ और झंगोरा जैसे ग्लूटन-फ्री अनाज से बने खाने डायबिटीज और लाइफस्टाइल बीमारियों में बहुत फायदेमंद होते हैं।
- गहत की दाल और हल्दी वाले व्यंजन ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखते हैं और रोगों से बचाते हैं।
- प्रोटीन और फाइबर से भरपूर पहाड़ी खाना पेट को देर तक भरा रखता है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
- पहाड़ी हल्दी, जम्बू, लिंगुड़ा और शहद जैसे तत्व शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
- पारंपरिक पहाड़ी भोजन में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट दिल को तंदुरुस्त रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल घटाते हैं।
- किण्वित (फर्मेंटेड) खाद्य पदार्थों से आंतें स्वस्थ रहती हैं और पाचनतंत्र मजबूत होता है।
- हल्दी और ‘पहाड़ी गोली’ जैसे पारंपरिक नुस्खे जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम पहुंचाते हैं।
- स्थानीय अनाज और शुद्ध शहद से बनी चीज़ें शरीर को लंबी ऊर्जा देती हैं, बिना किसी थकावट के।
निष्कर्ष | Conclusion
दोस्तों, उत्तराखंड का पहाड़ी व्यंजन खाने से कहीं बढ़कर है। यह संस्कृति, परंपरा और स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न अंग है। यह हमें सिखाता है कि स्वादिष्ट भोजन, सादा, मौसमी और टिकाऊ हो सकता है। दोस्तों, चाहे आप उत्तराखंड से हों या नहीं, पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद चखना मानो पहाड़ों की आत्मा को महसूस करना है। अगली बार जब आप पहाड़ों पर जाएँ, तो आलू के गुटके, कफूली या झंगोरा खीर का मीठा स्वाद लेना न भूलें। यह सिर्फ़ खाना नहीं, पहाड़ के लोगों का प्यार है!
उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजनों के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. पहाड़ी व्यंजन का क्या अर्थ है?
पहाड़ी व्यंजन उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बनने वाले पारंपरिक भोजन को कहते हैं, जिसे स्थानीय सामग्री और साधारण मसालों से पकाया जाता है।
2. क्या पहाड़ी खाना स्वास्थ्यवर्धक होता है?
हाँ, यह बहुत स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसमें मंडुआ जैसे अनाज, दालें और पत्तेदार सब्ज़ियाँ शामिल होती हैं जो पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
3. क्या पहाड़ी व्यंजनों में कोई मांसाहारी व्यंजन भी शामिल हैं?
हाँ, कुछ इलाकों में, खासकर शादियों के दौरान, मटन करी और चिकन करी जैसे व्यंजन भी बनाए जाते हैं।
4. कफुली किससे बनती है?
कफुली पालक और लाई जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियों से बनती है, जिसे चावल के पेस्ट और मसालों के साथ पकाया जाता है।
5. क्या पहाड़ी खाना तीखा होता है?
यह हल्का तीखा होता है।
6. भांग की चटनी क्या है?
यह भुने हुए भांग के बीज, लहसुन और नींबू से बनी एक अनोखी चटनी है। आलू के गुटके के साथ यह बहुत लोकप्रिय है।
7. मैं असली पहाड़ी खाना कहाँ खा सकता हूँ?
आप इसे उत्तराखंड के स्थानीय घरों में या देहरादून, नैनीताल और ऋषिकेश जैसे शहरों के कुछ रेस्टोरेंट में आज़मा सकते हैं।

Pankaj Rawat is the founder of ‘Pahadi Suvidha’ and a content creator from Uttarakhand. Having grown up in the mountains, he shares his authentic experiences related to Pahari culture, cuisine, travel, and lifestyle. His objective is to provide people with authentic and useful information about Uttarakhand in both Hindi and English.
Through his content, he helps readers understand the traditional lifestyle of the mountains, healthy dietary habits, and places worth visiting. The primary focus of his work is on providing information that is practical, easy to understand, and grounded in his own personal experiences.











Bahut hi badhiya article hai
Bahut-bahut dhanyavaad 🙏
Aapko hamara article pasand aaya, yahi hamari mehnat ki sabse badi safalta hai.